दोस्तो, इसके शीर्षक पर मत जाइए। मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य युलर आदि महान गनित्विज्ञयो के योगदान को कम करना या उनकी आलोचना करना कतई नही है। (वैसे भी मेरे द्वारा कुछ कहने से उनकी सेहत पर कोई फर्क भी नहीं होगा।) मेरा उद्देश्य लोगों को इस सभ्यता द्वारा गणित के क्षेत्र में किये गये योगदानों से अवगत करना है। जो कार्य पश्चिमी सभ्यता के लोगों द्वारा १३-१४ सदी बाद किया गया वह इस देश के आर्यभट्टो, भास्कराचार्यों ने उनसे हज़ार वर्षों पहले कर लिया था। आज लोगों को यह तो पता है कि यह महान गणित्यग थे; लेकिन इनके योगदान के नाम पर ज़्यादा-से-ज़्यादा लोग शुन्य के आविष्कार इनसे जोड़ देंगे। लेकिन सच यह है कि इन व्यक्तियों का योगदान इससे कई गुना अधिक है। दुनिया कि छोड़िये, भारत में भी यह बातें कोर्स कि किताबों में पढ़ाना शायद मना। आख़िर भूरे आदि-मानव कि औकात कि वह इतना सोच सके…।
खगोल विज्ञान एवम गणित के क्षेत्र मे इनके द्वारा किये कार्य को अगर इनका नाम दिया जाये तो किसी का क्या घट जाएगा? लेकिन नहीं, हम तुच्छ – गुलामी कि पैदाइश – इतने महान कार्य कैसे कर सकते हैं। और इस बार में किसी उड़ने वाले यन्त्र या विनाशकारी हथियारों कि बात नहीं कर रहा; मैं बात कर रह हूँ – theoretical maths & astronomy – कि जिसका प्रमाण भी उपलब्ध है।
मैं उत्सुक व्यक्तियों के लिए कुछ कडिया दे रह हूँ; ज्ञान वृद्धि कि इच्छा हो तो देखियेगा…
सुभाष काक (detail papers)
विकिपीडिया (in brief)
Indian Maths (Student paper)
English Translation
April 18, 2007 at 10:34 pm |
शुभम्
ईआन पीअर्स के पेपर की कड़ी देने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया।
पंकज
April 18, 2007 at 10:34 pm |
शुभम्
ईआन पीअर्स के पेपर की कड़ी देने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया।
पंकज
April 18, 2007 at 10:34 pm |
शुभम्
ईआन पीअर्स के पेपर की कड़ी देने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया।
पंकज
April 19, 2007 at 2:36 am |
शुभम,
बहुत अच्छा लेख और बहुत बढिया कडियां.
हार्दिक धन्यवाद!
ई-स्वामी
April 19, 2007 at 2:36 am |
शुभम,
बहुत अच्छा लेख और बहुत बढिया कडियां.
हार्दिक धन्यवाद!
ई-स्वामी
April 19, 2007 at 2:36 am |
शुभम,
बहुत अच्छा लेख और बहुत बढिया कडियां.
हार्दिक धन्यवाद!
ई-स्वामी